सफ़र एक मंजिल की ओर

ऊपर से हां सब कर देते हैं की साथ देंगे 
पर बीच सफ़र में सब साथ छोड़ देते है 
जानते है मजबूरियां दिल की 
पर फिर भी ख़ामोश है बातें सबकी 
अपनी चालाकियों के फैसले थोप देते है 
नहीं माने बातें तो बेगैरत और खुदगर्ज कहलाओगे 
मान गए इनकी बातों को तो खुद से ही हार जाओगे 
डर तो लगता है सफ़र में पर बिना डर के जंग कैसे जीत जाओगे ... !
A silent person ✍️

Comments