दूर चले

बंधा हुआ हूं जंजीरों से 
क्या बोलूं फकीरों से 
मन के धागे टूट चुके 
हम भी उनसे दूर चले 
इस बेनामी दुनियां में 
मेरी छवि सा कोई नही 
कुछ रिश्ते यूं टूट चले 
हम भी उनसे दूर चले 
अब भरोसा नहीं है 
खुद के शब्दों पर भी 
इन शब्दों से भी हम दूर चले 
खुद से नहीं हुआ प्यार कभी 
दिखावे सा संसार सभी 
खुद में ही हम डूब चले 
इस दुनियां से हम चले ... !
A silent person ✍️

Comments